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विहाररत जैन साधु-संतों की विशेष सुरक्षा व्यवस्था हेतु राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति व आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की माँग

Jun 25, 2026



विषयः विहाररत जैन साधु-संतों की विशेष सुरक्षा व्यवस्था हेतु राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति व आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच की माँग ।


आदरणीय महोदय,

हम समस्त श्री भारतवर्षिय दिगम्बर जैन महासभा तथा सम्पूर्ण देश का जैन समाज अत्यन्त दुःख एवं गहरी वेदना के साथ आपका ध्यान 20 मई 2026 को मध्यप्रदेश के रीवा के समीप राष्ट्रीय राजमार्ग पर विहाररत परम पुज्य राष्ट्रसंत आचार्य श्री 108 विद्यासागरजी महाराज की सुशिष्या आर्यिका 105 श्रुतमती माताजी एवं आर्यिका 105 उपशममती माताजी को एक वाहन द्वारा अत्यंत क्रूरतापूर्वक कुचल दिए जाने की हृदयविदारक घटना की ओर आकर्षित करना चाहते हैं जिसमें दो पूज्य आर्यिकाओं का असामयिक समाधिमरण हो गया।

यह घटना केवल एक सड़क दुर्घटना मर नहीं मानी जा सकती। उपलब्ध तथ्यों एवं वीडियो क्लिपों के आधार पर समाज में गहरी आशंका एवं चिंता का वातावरण निर्मित हुआ है अतः इस प्रकरण की निष्पक्ष, पारदर्शी एवं उच्चस्तरीय जाँच अत्यन्त आवश्यक है।

जैन साधु-संत पूर्णतः निहत्थे, अहिंसक एवं पैदल विहार करने वाले तपस्वी होते हैं। वे किसी प्रकार की सुरक्षा या सुविधाओं का उपयोग नहीं करते तथा समाज में शांति, संयम और अहिंसा का संदेश प्रसारित करते हैं। ऐसे संतों के साथ लगातार बढ़ती दुर्घटनाएँ एवं हमले सम्पूर्ण समाज के लिए अत्यन्त चिंताजनक हैं।

अतः हम निम्न माँगें आपके समक्ष विनम्रतापूर्वक प्रस्तुत करते हैं:

1. घटना की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच SIT अथवा न्यायिक जांच कराई जाए।

2. घटना से संबंधित सभी CCTV वीडियो एवं डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित किए जाएँ। दोषियों पर कठोरतम कानूनी कार्यवाही की जाए। 3. यदि सुनियोजित कृत्य अथवा षड्यंत्र के तथ्य मिलें, तो तदनुसार कठोर धाराएं लगाई जाएँ।

विहाररत साधु-संतों की सुरक्षा हेतु

1. विहार मार्गों पर प्रशासनिक समन्वय, संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस सहयोग, ट्रैफिक नियंत्रण, चेतावनी संकेतक, हाईवे एवं मीड़भाड़ क्षेत्रों में विशेष सावधानी सुनिश्चित की जाए।

2. राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाई जाए। भारत सरकार द्वारा पैदल विहार करने वाले संतों हेतु राष्ट्रीय Guideline सुरक्षा तथा संवेदनशील मार्गों हेतु विशेष प्रावधान निर्मित किए जाएँ।

3. संतों के विरुद्ध अपराधों को विशेष संवेदनशील श्रेणी में रखा जाए क्योंकि साधु साधनों का उपयोग नहीं करते तथा पूर्णतः अहिंसक जीवन जीते हैं। संत आत्मरक्षा नहीं करते वाहन या सुरक्षा


                 जैन समाज सदैव शांति, अहिंसा, कानून और संवैधानिक मर्यादाओं में विश्वास रखता है। हमारा उद्देश्य किसी प्रकार का तनाव उत्पन्न करना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना एवं तपस्वी संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हमें पूर्ण विश्वास है कि भारत सरकार इस अत्यन्त संवेदनशील विषय को गंभीरता से लेते हुए त्वरित एवं प्रभावी कदम उठायेगा।

राष्ट्रीय अध्यक्ष

भवदीय

गजराज जैन गंगवाल

श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन महासमा